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vishnu 2.13.86: ब्राह्मण बोला - हे राजन ! आपने जो कहा कि 'अहंकार' शब्द से आत्मा में कोई दोष नहीं होता, वह ठीक है, परंतु जो मायामय 'अहंकार' शब्द है, जो अनात्मा में आत्मा का ज्ञान कराता है, वही दोष का कारण है ॥86॥   |   vishnu अध्याय 2.13: भरत-चरित्र   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 13: भरत-चरित्र  »  श्लोक 86
 
 
श्लोक  2.13.86 
ब्राह्मण उवाच
शब्दोऽहमिति दोषाय नात्मन्येष तथैव तत्।
अनात्मन्यात्मविज्ञानं शब्दो वा भ्रान्तिलक्षण:॥ ८६॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण बोला - हे राजन ! आपने जो कहा कि 'अहंकार' शब्द से आत्मा में कोई दोष नहीं होता, वह ठीक है, परंतु जो मायामय 'अहंकार' शब्द है, जो अनात्मा में आत्मा का ज्ञान कराता है, वही दोष का कारण है ॥86॥
 
The Brahmin said – O king! What you said that the word ‘ego’ does not cause any defect in the soul is right, but the illusory word ‘ego’ which gives knowledge of the self in the non-soul itself is the cause of the defect. 86॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)