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राजोवाच
धर्माधर्मौ न सन्देहस्सर्वकार्येषु कारणम्।
उपभोगनिमित्तं च देहाद्देहान्तरागम:॥ ८३॥
अनुवाद
राजा ने कहा - वास्तव में धर्म और अधर्म ही सभी कर्मों के कारण हैं और मनुष्य को अपने कर्मों का फल भोगने के लिए ही एक शरीर से दूसरे शरीर में जाना पड़ता है।
The king said - Indeed, Dharma and Adharma are the causes of all actions and one has to go from one body to another only to enjoy the fruits of his actions. 83
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥