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vishnu 2.13.75: हे राजन! जब मनुष्य स्वाभाविक कारणों से सर्वथा भिन्न है, तब मैं उसके परिश्रम को कैसे सहन कर सकता हूँ?॥ 75॥   |   vishnu अध्याय 2.13: भरत-चरित्र   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 13: भरत-चरित्र  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  2.13.75 
यदा पुंस: पृथग्भाव: प्राकृतै: कारणैर्नृप।
सोढव्यस्तु तदायास: कथं वा नृपते मया॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! जब मनुष्य स्वाभाविक कारणों से सर्वथा भिन्न है, तब मैं उसके परिश्रम को कैसे सहन कर सकता हूँ?॥ 75॥
 
O King! When the person is completely different from the natural causes then how can I bear his hard work?॥ 75॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)