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vishnu 2.13.44: हिरण्यगर्भ के इन सारगर्भित वचनों को स्मरण करके वह बुद्धिमान ब्राह्मण लोगों के बीच इस प्रकार उपस्थित होता था मानो वह जड़ और पागल हो गया हो ॥44॥   |   vishnu अध्याय 2.13: भरत-चरित्र   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 13: भरत-चरित्र  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  2.13.44 
हिरण्यगर्भवचनं विचिन्त्येत्थं महामति:।
आत्मानं दर्शयामास जडोन्मत्ताकृतिं जने॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
हिरण्यगर्भ के इन सारगर्भित वचनों को स्मरण करके वह बुद्धिमान ब्राह्मण लोगों के बीच इस प्रकार उपस्थित होता था मानो वह जड़ और पागल हो गया हो ॥44॥
 
Remembering these pithy words of Hiranyagarbha, the wise Brahmin used to present himself among the people as if he was inert and mad. ॥44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)