Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 vishnu 2.13.43: अतः योगी को चाहिए कि वह सत्यमार्ग को दूषित न करे, अपितु ऐसा आचरण करे कि लोग उसका अनादर करें और उसे सत्संगति से दूर रखें ॥ 43॥ | vishnu अध्याय 2.13: भरत-चरित्र । vishnu अंश 2: द्वितीय अंश । श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्माच्चरेत वै योगी सतां धर्ममदूषयन्।
जना यथावमन्येरन्गच्छेयुर्नैव सङ्गतिम्॥ ४३॥
अनुवाद
अतः योगी को चाहिए कि वह सत्यमार्ग को दूषित न करे, अपितु ऐसा आचरण करे कि लोग उसका अनादर करें और उसे सत्संगति से दूर रखें ॥ 43॥
Therefore, a yogi should not pollute the right path but should behave in such a manner that people disrespect him and keep him away from good company. ॥ 43॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥