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vishnu 2.13.42: हे मैत्रेय! योगश्री के लिए सबसे अधिक हानिकारक वस्तु है सम्मान। जो योगी दूसरों से अपमानित होता है, वह शीघ्र ही सिद्धि प्राप्त कर लेता है ॥ 42॥   |   vishnu अध्याय 2.13: भरत-चरित्र   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 13: भरत-चरित्र  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  2.13.42 
सम्मानना परां हानिं योगर्द्धे: कुरुते यत:।
जनेनावमतो योगी योगसिद्धिं च विन्दति॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
हे मैत्रेय! योगश्री के लिए सबसे अधिक हानिकारक वस्तु है सम्मान। जो योगी दूसरों से अपमानित होता है, वह शीघ्र ही सिद्धि प्राप्त कर लेता है ॥ 42॥
 
O Maitreya! The most harmful thing for a Yog Shree is respect. A Yogi who is insulted by other people soon attains success. ॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)