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vishnu 2.13.28: भरत मुनि इस प्रकार उस बालक की चिंता करते थे जो विलम्ब से आता था और जब वह उसके पास आता तो उनका मुख उसके प्रति प्रेम से चमक उठता था॥ 28॥   |   vishnu अध्याय 2.13: भरत-चरित्र   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 13: भरत-चरित्र  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  2.13.28 
इत्थं चिरगते तस्मिन‍्स चक्रे मानसं मुनि:।
प्रीतिप्रसन्नवदन: पार्श्वस्थे चाभवन‍्मृगे॥ २८॥
 
 
अनुवाद
भरत मुनि इस प्रकार उस बालक की चिंता करते थे जो विलम्ब से आता था और जब वह उसके पास आता तो उनका मुख उसके प्रति प्रेम से चमक उठता था॥ 28॥
 
Bharata Muni used to worry like this for the child who was late and whenever he came near him, his face used to light up with love for him.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)