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vishnu 2.13.103: हे पृथ्वी के स्वामी! आप इन सब तत्त्वों से पृथक हैं; अतः सावधान होकर ‘मैं कौन हूँ?’ इसका विचार कीजिए॥103॥   |   vishnu अध्याय 2.13: भरत-चरित्र   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 13: भरत-चरित्र  »  श्लोक 103
 
 
श्लोक  2.13.103 
समस्तावयवेभ्यस्त्वं पृथग्भूय व्यवस्थित:।
कोऽहमित्यत्र निपुणो भूत्वा चिन्तय पार्थिव॥ १०३॥
 
 
अनुवाद
हे पृथ्वी के स्वामी! आप इन सब तत्त्वों से पृथक हैं; अतः सावधान होकर ‘मैं कौन हूँ?’ इसका विचार कीजिए॥103॥
 
O Lord of the Earth! You are separate from all these elements; therefore be careful and think about 'Who am I?'॥ 103॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)