श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 12: नवग्रहोंका वर्णन तथा लोकान्तरसम्बन्धी व्याख्यानका उपसंहार  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.12.9 
अप्सु तस्मिन्नहोरात्रे पूर्वं विशति चन्द्रमा:।
ततो वीरुत्सु वसति प्रयात्यर्कं तत: क्रमात्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
उस रात्रि में वह पहले जल में प्रवेश करता है, फिर वृक्षों और लताओं आदि में निवास करता है और तत्पश्चात् धीरे-धीरे सूर्य में चला जाता है॥9॥
 
That night he first enters the water, then resides in trees and creepers etc. and thereafter gradually goes into the sun.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)