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vishnu 2.12.6: हे मैत्रेय! इस प्रकार देवतागण अर्धमासिक में एकत्रित चन्द्रमा के अमृत का पान करने लगते हैं, क्योंकि अमृत देवताओं का आहार है॥6॥   |   vishnu अध्याय 2.12: नवग्रहोंका वर्णन तथा लोकान्तरसम्बन्धी व्याख्यानका उपसंहार   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 12: नवग्रहोंका वर्णन तथा लोकान्तरसम्बन्धी व्याख्यानका उपसंहार  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.12.6 
सम्भृतं चार्धमासेन तत्सोमस्थं सुधामृतम्।
पिबन्ति देवा मैत्रेय सुधाहारा यतोऽमरा:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे मैत्रेय! इस प्रकार देवतागण अर्धमासिक में एकत्रित चन्द्रमा के अमृत का पान करने लगते हैं, क्योंकि अमृत देवताओं का आहार है॥6॥
 
O Maitreya! In this way, the gods start drinking the nectar of the moon collected in half a month because nectar is the diet of the gods.॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)