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vishnu 2.12.5: जिस क्रम से देवतागण चन्द्रमा का पान करते हैं, उसी क्रम से जलप्रिय सूर्यदेव शुक्ल प्रतिपदा से प्रतिदिन उन्हें बल प्रदान करते हैं॥5॥   |   vishnu अध्याय 2.12: नवग्रहोंका वर्णन तथा लोकान्तरसम्बन्धी व्याख्यानका उपसंहार   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 12: नवग्रहोंका वर्णन तथा लोकान्तरसम्बन्धी व्याख्यानका उपसंहार  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.12.5 
क्रमेण येन पीतोऽसौ देवैस्तेन निशाकरम्।
आप्याययत्यनुदिनं भास्करो वारितस्कर:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
जिस क्रम से देवतागण चन्द्रमा का पान करते हैं, उसी क्रम से जलप्रिय सूर्यदेव शुक्ल प्रतिपदा से प्रतिदिन उन्हें बल प्रदान करते हैं॥5॥
 
In the same order in which the gods drink the moon, the water-loving Sun God strengthens them every day with Shukla Pratipada. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)