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vishnu 2.12.46: [इस ज्ञानमार्ग के अतिरिक्त] मैंने कर्ममार्ग, पशु, वाहन, समस्त ऋत्विक्, सोम, सुरगण और दिव्य कामनाओं आदि से संबंधित यज्ञों का भी वर्णन किया है। भूर्लोकादि का संपूर्ण भोग इन्हीं कर्मों का फल है। 46॥   |   vishnu अध्याय 2.12: नवग्रहोंका वर्णन तथा लोकान्तरसम्बन्धी व्याख्यानका उपसंहार   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 12: नवग्रहोंका वर्णन तथा लोकान्तरसम्बन्धी व्याख्यानका उपसंहार  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  2.12.46 
यज्ञ: पशुर्वह्निरशेषऋत्विक्
सोम: सुरा: स्वर्गमयश्च काम:।
इत्यादिकर्माश्रितमार्गदृष्टं
भूरादिभोगाश्च फलानि तेषाम्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
[इस ज्ञानमार्ग के अतिरिक्त] मैंने कर्ममार्ग, पशु, वाहन, समस्त ऋत्विक्, सोम, सुरगण और दिव्य कामनाओं आदि से संबंधित यज्ञों का भी वर्णन किया है। भूर्लोकादि का संपूर्ण भोग इन्हीं कर्मों का फल है। 46॥
 
[Apart from this path of knowledge] I also explained about the yagya related to the path of action, animals, vehicle, all Ritvik, Soma, Surgana and heavenly desires etc. The entire enjoyment of Bhurlokadi is the result of these activities. 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)