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vishnu 2.12.4: हे मैत्रेय! सुरगणा पीने से दुर्बल हो चुके तेजस्वी सूर्यदेव अपनी एक किरण से तेजस्वी चन्द्रमा को पुनः पुष्ट करते हैं॥4॥   |   vishnu अध्याय 2.12: नवग्रहोंका वर्णन तथा लोकान्तरसम्बन्धी व्याख्यानका उपसंहार   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 12: नवग्रहोंका वर्णन तथा लोकान्तरसम्बन्धी व्याख्यानका उपसंहार  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.12.4 
क्षीणं पीतं सुरै: सोममाप्याययति दीप्तिमान्।
मैत्रेयैककलं सन्तं रश्मिनैकेन भास्कर:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे मैत्रेय! सुरगणा पीने से दुर्बल हो चुके तेजस्वी सूर्यदेव अपनी एक किरण से तेजस्वी चन्द्रमा को पुनः पुष्ट करते हैं॥4॥
 
O Maitreya! The bright Sun God, who has become weak due to drinking Surgana, nourishes the bright Moon again with one of his rays. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)