Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 vishnu 2.12.33-34: संवत्सर उसका लिंग है, मित्र ने अपने देश की रक्षा की है और अग्नि, महेन्द्र, कश्यप और ध्रुव पुच्छ में स्थित हैं। शिशुमार के पुच्छ में स्थित अग्नि के समान ये चार तारे कभी अस्त नहीं होते ॥33-34॥ | vishnu अध्याय 2.12: नवग्रहोंका वर्णन तथा लोकान्तरसम्बन्धी व्याख्यानका उपसंहार । vishnu अंश 2: द्वितीय अंश । श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
संवत्सर उसका लिंग है, मित्र ने अपने देश की रक्षा की है और अग्नि, महेन्द्र, कश्यप और ध्रुव पुच्छ में स्थित हैं। शिशुमार के पुच्छ में स्थित अग्नि के समान ये चार तारे कभी अस्त नहीं होते ॥33-34॥
Samvatsara is his penis, Mitra has protected his own country, and Agni, Mahendra, Kashyap and Dhruva are situated in the tail part. These four stars like Agni situated in the tail part of Shishumar never set. 33-34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥