Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
vishnu 2.12.3: हे महामुनि! सूर्य के समान समुद्र के गर्भ से उत्पन्न हुए इसके घोड़े एक बार जुत जाने पर एक कल्प तक रथ को खींचते रहते हैं।   |   vishnu अध्याय 2.12: नवग्रहोंका वर्णन तथा लोकान्तरसम्बन्धी व्याख्यानका उपसंहार   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 12: नवग्रहोंका वर्णन तथा लोकान्तरसम्बन्धी व्याख्यानका उपसंहार  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.12.3 
अर्कस्येव हि तस्याश्वा: सकृद्युक्ता वहन्ति ते।
कल्पमेकं मुनिश्रेष्ठ वारिगर्भसमुद्भवा:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे महामुनि! सूर्य के समान समुद्र के गर्भ से उत्पन्न हुए इसके घोड़े एक बार जुत जाने पर एक कल्प तक रथ को खींचते रहते हैं।
 
O great sage! Like the Sun, its horses, born from the womb of the ocean, when yoked once, continue to pull the chariot for a kalpa.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)