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vishnu 2.12.28: क्योंकि इस वायु चक्र से प्रेरित होकर सभी ग्रह घूमते हुए लट्टू (केले के पहिये) की तरह घूमते हैं, इसलिए इसे 'प्रवाह' कहते हैं।   |   vishnu अध्याय 2.12: नवग्रहोंका वर्णन तथा लोकान्तरसम्बन्धी व्याख्यानका उपसंहार   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 12: नवग्रहोंका वर्णन तथा लोकान्तरसम्बन्धी व्याख्यानका उपसंहार  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  2.12.28 
अलातचक्रवद्यान्ति वातचक्रेरितानि तु।
यस्माज्ज्योतींषि वहति प्रवहस्तेन स स्मृत:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
क्योंकि इस वायु चक्र से प्रेरित होकर सभी ग्रह घूमते हुए लट्टू (केले के पहिये) की तरह घूमते हैं, इसलिए इसे 'प्रवाह' कहते हैं।
 
Because, inspired by this cycle of wind, all the planets revolve like a spinning top (banana wheel), therefore, it is called 'Pravaha'. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)