Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
vishnu 2.12.27: जैसे तेली स्वयं घूमते हुए तेली कोल्हू को घुमाते रहते हैं, वैसे ही समस्त ग्रह वायु से आबद्ध होकर घूमते रहते हैं॥27॥   |   vishnu अध्याय 2.12: नवग्रहोंका वर्णन तथा लोकान्तरसम्बन्धी व्याख्यानका उपसंहार   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 12: नवग्रहोंका वर्णन तथा लोकान्तरसम्बन्धी व्याख्यानका उपसंहार  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.12.27 
तैलपीडा यथा चक्रं भ्रमन्तो भ्रामयन्ति वै।
तथा भ्रमन्ति ज्योतींषि वातविद्धानि सर्वश:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
जैसे तेली स्वयं घूमते हुए तेली कोल्हू को घुमाते रहते हैं, वैसे ही समस्त ग्रह वायु से आबद्ध होकर घूमते रहते हैं॥27॥
 
Just as the oilmen themselves keep rotating the oil-press while rotating, similarly all the planets keep rotating being bound by the air.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)