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vishnu 2.12.25: हे मैत्रेय! समस्त ग्रह, तारे और नक्षत्र वायुरूपी रस्सी द्वारा ध्रुव से बंधे हुए, यथायोग्य परिक्रमा करते रहते हैं।   |   vishnu अध्याय 2.12: नवग्रहोंका वर्णन तथा लोकान्तरसम्बन्धी व्याख्यानका उपसंहार   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 12: नवग्रहोंका वर्णन तथा लोकान्तरसम्बन्धी व्याख्यानका उपसंहार  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.12.25 
ग्रहर्क्षताराधिष्ण्यानि ध्रुवे बद्धान्यशेषत:।
भ्रमन्त्युचितचारेण मैत्रेयानिलरश्मिभि:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
हे मैत्रेय! समस्त ग्रह, तारे और नक्षत्र वायुरूपी रस्सी द्वारा ध्रुव से बंधे हुए, यथायोग्य परिक्रमा करते रहते हैं।
 
O Maitreya! All the planets, stars and constellations keep revolving in a proper manner, tied to the Pole by a rope of air. 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)