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vishnu 2.12.11: जब पंद्रहवीं कला का केवल थोड़ा सा अंश ही शेष रह जाता है, तब मध्यान्ह के समय पितर क्षीण हुए चंद्रमा को सब ओर से घेर लेते हैं ॥11॥   |   vishnu अध्याय 2.12: नवग्रहोंका वर्णन तथा लोकान्तरसम्बन्धी व्याख्यानका उपसंहार   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 12: नवग्रहोंका वर्णन तथा लोकान्तरसम्बन्धी व्याख्यानका उपसंहार  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.12.11 
सोमं पञ्चदशे भागे किञ्चिच्छिष्टे कलात्मके।
अपराह्णे पितृगणा जघन्यं पर्युपासते॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जब पंद्रहवीं कला का केवल थोड़ा सा अंश ही शेष रह जाता है, तब मध्यान्ह के समय पितर क्षीण हुए चंद्रमा को सब ओर से घेर लेते हैं ॥11॥
 
When only a small part of the fifteenth art form remains, the ancestors surround the weakened moon from all sides in the afternoon. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)