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vishnu 2.11.20: हे द्विज! इसी प्रकार वह वैष्णवी शक्ति कभी सूर्य के रथ में विचरण नहीं करती तथा प्रत्येक मास में जब सूर्य (परिवर्तन) करता है और उसमें स्थित होता है, तब वह उसकी अधिष्ठात्री देवी होती है। 20॥   |   vishnu अध्याय 2.11: सूर्यशक्ति एवं वैष्णवी शक्तिका वर्णन   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 11: सूर्यशक्ति एवं वैष्णवी शक्तिका वर्णन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.11.20 
एवं सा वैष्णवी शक्तिर्नैवापैति ततो द्विज।
मासानुमासं भास्वन्तमध्यास्ते तत्र संस्थितम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
हे द्विज! इसी प्रकार वह वैष्णवी शक्ति कभी सूर्य के रथ में विचरण नहीं करती तथा प्रत्येक मास में जब सूर्य (परिवर्तन) करता है और उसमें स्थित होता है, तब वह उसकी अधिष्ठात्री देवी होती है। 20॥
 
Hey Dwija! Similarly, that Vaishnavi Shakti never moves in the chariot of the Sun and in every month, when the Sun [changes] and is situated in it, she is its presiding deity. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)