Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 vishnu 2.11.18: त्रयशक्तिरूपी भगवान विष्णु न तो उदय होते हैं, न अस्त होते हैं [अर्थात् वे सदैव स्थायी रूप से विद्यमान रहते हैं]; ये सात प्रकार के गण उनसे भिन्न हैं॥18॥ | vishnu अध्याय 2.11: सूर्यशक्ति एवं वैष्णवी शक्तिका वर्णन । vishnu अंश 2: द्वितीय अंश । श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नोदेता नास्तमेता च कदाचिच्छक्तिरूपधृक्।
विष्णुर्विष्णो: पृथक्तस्य गणस्सप्तविधोऽप्ययम्॥ १८॥
अनुवाद
त्रयशक्तिरूपी भगवान विष्णु न तो उदय होते हैं, न अस्त होते हैं [अर्थात् वे सदैव स्थायी रूप से विद्यमान रहते हैं]; ये सात प्रकार के गण उनसे भिन्न हैं॥18॥
Lord Vishnu in the form of Triyashakti neither rises nor sets [that is, he always exists permanently]; These seven types of Ganas are different from them. 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥