श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 10: द्वादश सूर्योंके नाम एवं अधिकारियोंका वर्णन  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  2.10.3-4 
धाता क्रतुस्थला चैव पुलस्त्यो वासुकिस्तथा।
रथभृद‍्ग्रामणीर्हेतिस्तुम्बुरुश्चैव सप्तम:॥ ३॥
एते वसन्ति वै चैत्रे मधुमासे सदैव हि।
मैत्रेय स्यन्दने भानो: सप्त मासाधिकारिण:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे मैत्रेय! मधु मास चैत्र में धाता नामक आदित्य, क्रतुस्थल अप्सरा, पुलस्त्य ऋषि, वासुकी सर्प, रथभृत यक्ष, हेति राक्षस और तुम्बुरु गंधर्व - ये सात माह के अधिकारी सदैव सूर्य के रथ में रहते हैं। 3-4॥
 
O Maitreya! In Madhu month Chaitra, Aditya named Dhata, Kratusthala Apsara, Pulastya Rishi, Vasuki Sarpa, Rathbhrit Yaksha, Heti Rakshasa and Tumburu Gandharva - these seven month officers always remain in the chariot of Sun. 3-4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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