श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 10: द्वादश सूर्योंके नाम एवं अधिकारियोंका वर्णन  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  2.10.14-15 
क्रतुर्भगस्तथोर्णायु: स्फूर्ज: कर्कोटकस्तथा।
अरिष्टनेमिश्चैवान‍्या पूर्वचित्तिर्वराप्सरा:॥ १४॥
पौषमासे वसन्त्येते सप्त भास्करमण्डले।
लोकप्रकाशनार्थाय विप्रवर्याधिकारिण:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे विप्रवर! पौष माह में ऋषि क्रतु, भग आदित्य, ऊर्णय गंधर्व, स्पुरजा राक्षस, कर्कोटक सर्प, अरिष्टनेमि यक्ष और पूर्वचित्ति अप्सरा सूर्यमंडल में रहकर संसार को प्रकाशित करते हैं। 14-15॥
 
O Vipravara! In the month of Paush, Sage Kratu, Bhaga Aditya, Urnaya Gandharva, Spurja Rakshas, ​​Karkotak Sarpa, Arishtanemi Yaksha and Purvachitti Apsara live in the solar system to illuminate the world. 14-15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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