श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 10: द्वादश सूर्योंके नाम एवं अधिकारियोंका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.10.1 
श्रीपराशर उवाच
साशीतिमण्डलशतं काष्ठयोरन्तरं द्वयो:।
आरोहणावरोहाभ्यां भानोरब्देन या गति:॥ १॥
 
 
अनुवाद
श्री पाराशरजी बोले - एक वर्ष में सूर्य की आरोहण और अवरोहण की गति सम्पूर्ण मार्ग के दोनों ध्रुवों के बीच का अंतर है ॥1॥
 
Shri Parasharji said – The speed of the Sun in a year through its ascent and descent is the difference between the two poles of the entire route. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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