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vishnu 2.1.40: मनस्युक का पुत्र त्वष्टा था, त्वष्टाक का पुत्र विराज था और विराज का पुत्र राजा था। हे मुने! राजा के पुत्र शतजित के सौ पुत्र थे। 40॥   |   vishnu अध्याय 2.1: प्रियव्रतके वंशका वर्णन   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 1: प्रियव्रतके वंशका वर्णन  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  2.1.40 
त्वष्टा त्वष्टुश्च विरजो रजस्तस्याप्यभूत्सुत:।
शतजिद्रजसस्तस्य जज्ञे पुत्रशतं मुने॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
मनस्युक का पुत्र त्वष्टा था, त्वष्टाक का पुत्र विराज था और विराज का पुत्र राजा था। हे मुने! राजा के पुत्र शतजित के सौ पुत्र थे। 40॥
 
Manasyuka's son was Tvashta, Tvashtaka's son was Viraja and Viraja's son was Raja. Hey Mune! Raja's son Shatajit had hundred sons. 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)