श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान‍्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  1.9.91 
तेजसा नागराजानं तथाप्यायितवान‍्हरि:।
अन्येन तेजसा देवानुपबृंहितवान‍्प्रभु:॥ ९१॥
 
 
अनुवाद
भगवान् हरि अपने तेज से नागराज वासुकि को बल प्रदान कर रहे थे और अपने दूसरे तेज से देवताओं का बल बढ़ा रहे थे ॥91॥
 
Lord Hari was imparting strength to King of Serpents Vasuki with his radiance and with his other radiance he was increasing the strength of the gods. ॥91॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)