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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन
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श्लोक 87
श्लोक
1.9.87
तेनैव मुखनिश्वासवायुनास्तबलाहकै:।
पुच्छप्रदेशे वर्षद्भिस्तदा चाप्यायिता: सुरा:॥ ८७॥
अनुवाद
और ज्यों-ज्यों वही श्वास व्याकुल बादलोंकी पूँछोंपर बरसती रही, त्यों-त्यों देवताओंकी शक्ति बढ़ती गई ॥87॥
And as the same breath kept raining down on the tails of the agitated clouds, the power of the gods kept increasing. ॥ 87॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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