vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 1: प्रथम अंश
»
अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन
»
श्लोक 8
श्लोक
1.9.8
तामात्मन: स शिरस: स्रजमुन्मत्तषट्पदाम्।
आदायामरराजाय चिक्षेपोन्मत्तवन्मुनि:॥ ८ ॥
अनुवाद
उन्हें देखकर ऋषि दुर्वासा ने पागल की तरह अपने सिर से मधुमक्खियों से भिनभिनाती हुई माला उतारी और उसे देवताओं के राजा इंद्र पर फेंक दिया।
On seeing them, sage Durvasa, like a madman, took off from his head the garland buzzing with bees and threw it at Indra, the king of gods.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×