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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन
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श्लोक 75
श्लोक
1.9.75
श्रीपराशर उवाच
एवं संस्तूयमानस्तु प्रणतैरमरैर्हरि:।
प्रसन्नदृष्टिर्भगवानिदमाह स विश्वकृत्॥ ७५॥
अनुवाद
श्री पराशरजी बोले - इस प्रकार विनम्र देवताओं द्वारा स्तुति किये जाने पर जगत् के रचयिता भगवान् हरि प्रसन्न होकर इस प्रकार बोले - ॥75॥
Shri Parasharji said – On being praised in this way by the humble gods, Lord Hari, the creator of the world, became pleased and said thus – ॥ 75॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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