श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान‍्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  1.9.74 
त्वं प्रसादं प्रसन्नात्मन् प्रपन्नानां कुरुष्व न:।
तेजसां नाथ सर्वेषां स्वशक्त्याप्यायनं कुरु॥ ७४ ॥
 
 
अनुवाद
हे प्रसन्न! हम शरणागतों पर प्रसन्न होइए और हे नाथ! अपनी शक्ति से हम सब देवताओं का तेज बढ़ाइए॥ 74॥
 
O pleased one! Be pleased with us who have sought refuge and O Nath! With your power increase the [lost] glory of all of us gods. ॥ 74॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)