श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान‍्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  1.9.73 
तावदार्त्तिस्तथा वाञ्छा तावन्मोहस्तथाऽसुखम्।
यावन्न याति शरणं त्वामशेषाघनाशनम्॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! जब तक जीव समस्त पापों का नाश करने वाले आपके शरणागत नहीं होता, तब तक दरिद्रता, कामना, आसक्ति और शोक आदि उसमें स्थित रहते हैं॥73॥
 
O Lord! As long as a soul does not surrender to you, who destroys all sins, poverty, desire, attachment and sorrow, etc., persist in it. ॥ 73॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)