श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान‍्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  1.9.71 
त्वं यज्ञस्त्वं वषट्कारस्त्वमोङ्कार: प्रजापति:।
विद्या वेद्यं च सर्वात्मंस्त्वन्मयं चाखिलं जगत्॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
आप ही यज्ञ हैं, आप ही वषट्कार हैं, आप ही ओंकार और प्रजापति हैं। हे सर्वात्मा! ज्ञान, वेद और सम्पूर्ण जगत् आपका ही स्वरूप है।॥71॥
 
You are the sacrifice, you are the Vashatkar, you are the Omkar and Prajapati. O Sarvaatman! Knowledge, Vedas and the entire universe are your form. ॥ 71॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)