वसवो मरुत: साध्या विश्वेदेवगणा: भवान्।
योऽयं तवाग्रतो देव समीपं देवतागण:।
स त्वमेव जगत्स्रष्टा यत: सर्वगतो भवान्॥ ७०॥
अनुवाद
हे प्रभु! वसु, मरुत, साध्य और विश्वेदेव भी आप ही हैं। और हे जगत् के रचयिता, आपके सम्मुख यह देवताओं का समूह भी आप ही हैं, क्योंकि आप सर्वत्र परिपूर्ण हैं ॥70॥
O Lord! The Vasus, Maruts, Sadhyas and Vishvedevs are also you. And this group of gods in front of you, O creator of the universe, is also you because you are perfect everywhere. ॥ 70॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥