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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन
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श्लोक 66
श्लोक
1.9.66
श्रीपराशर उवाच
एवं संस्तूयमानस्तु भगवाञ्छङ्खचक्रधृक्।
जगाम दर्शनं तेषां मैत्रेय परमेश्वर:॥ ६६॥
अनुवाद
श्री पराशर बोले - हे मैत्रेय! इस प्रकार स्तुति होने पर शंख और चक्र धारण किये हुए भगवान् उनके समक्ष प्रकट हुए।
Shri Parashara said - O Maitreya! After being praised in this manner, the Supreme Lord holding conch and discus appeared before him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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