श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान‍्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  1.9.62 
भगव न‍् भूतभव्येश यज्ञमूर्त्तिधराव्यय।
प्रसीद प्रणतानां त्वं सर्वेषां देहि दर्शनम्॥ ६२ ॥
 
 
अनुवाद
हे भूत-भवयेश यज्ञमूर्तिधर! हे अव्यय! हम सब शरणागतों पर प्रसन्न होकर हमें अपना दर्शन दीजिए। 62॥
 
O Lord of Bhoota-Bhavyaesh Yajnamurtidhaar! Hey Avyaya! Please be pleased with all of us who surrender and give us your darshan. 62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)