श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान‍्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.9.6 
तामादायात्मनो मूर्ध्नि स्रजमुन्मत्तरूपधृक्।
कृत्वा स विप्रो मैत्रेय परिबभ्राम मेदिनीम्॥ ६ ॥
 
 
अनुवाद
हे मैत्रेय! उस पागल ब्राह्मण ने उसे उठाकर अपने सिर पर रख लिया और पृथ्वी पर विचरण करने लगा।
 
O Maitreya! That mad Brahmin took it, placed it on his head and started wandering on the earth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)