श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान‍्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  1.9.59 
यन्नायं भगवान‍् ब्रह्मा जानाति परमं पदम्।
तन्नता: स्म जगद्धाम तव सर्वगताच्युत॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
हे अच्युत, जो जगत में सर्वत्र व्याप्त हैं! हम आपके उस परम धाम को नमस्कार करते हैं जिसे ब्रह्मा भी नहीं जानते।
 
O infallible one, who is omnipresent in the world! We bow to your supreme abode which even Lord Brahma does not know.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)