श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान‍्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  1.9.56 
शक्तयो यस्य देवस्य ब्रह्मविष्णुशिवात्मिका:।
भवन्त्यभूतपूर्वस्य तद्विष्णो: परमं पदम्॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मा, विष्णु और शिव रूपी शक्तियों से युक्त वह अभूतपूर्व देवता भगवान विष्णु की परम शक्ति है ॥56॥
 
The unprecedented deity who has powers in the form of Brahma, Vishnu and Shiva is the supreme power of Lord Vishnu. 56॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)