vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 1: प्रथम अंश
»
अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन
»
श्लोक 56
श्लोक
1.9.56
शक्तयो यस्य देवस्य ब्रह्मविष्णुशिवात्मिका:।
भवन्त्यभूतपूर्वस्य तद्विष्णो: परमं पदम्॥ ५६॥
अनुवाद
ब्रह्मा, विष्णु और शिव रूपी शक्तियों से युक्त वह अभूतपूर्व देवता भगवान विष्णु की परम शक्ति है ॥56॥
The unprecedented deity who has powers in the form of Brahma, Vishnu and Shiva is the supreme power of Lord Vishnu. 56॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×