श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान‍्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  1.9.53 
यस्यायुतायुतांशांशे विश्वशक्तिरियं स्थिता।
परब्रह्मस्वरूपं यत्प्रणमामस्तमव्ययम्॥ ५३ ॥
 
 
अनुवाद
जिनके दस हजारवें अंश में जगत् की रचना की शक्ति स्थित है और जो परब्रह्मस्वरूप हैं, उन अविनाशी को हम नमस्कार करते हैं ॥ 53॥
 
We offer our obeisance to that indestructible One in whose ten-thousandth part the power of creation of the universe is situated and who is the form of the Supreme Brahman. ॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)