जो महतत्त्व के कार्य (अहंकार) का कार्य (तन्मात्रा-पंचक) है, जो उसके कार्य (भूत-पंचक) का कार्य (ब्रह्माण्ड) है और जो उसके कार्य (ब्रह्मा-दक्ष आदि) के कार्य (प्रजापतियों के पुत्र और पौत्र) हैं, उनको हम नमस्कार करते हैं। ॥48॥
We salute him who is the work (Tanmatra-Panchaka) of the work (Ahankar) of the work (Mahatattva), who is the work (Universe) of its work (Bhoota-Panchaka) and who is the work (sons and grandsons of Prajapatis) of its work (Brahma-Daksha etc.). ॥48॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥