प्रोच्यते परमेशो हि य: शुद्धोऽप्युपचारत:।
प्रसीदतु स नो विष्णुरात्मा य: सर्वदेहिनाम्॥ ४६॥
अनुवाद
जो स्वरूप से शुद्ध होते हुए भी भगवान (परमा=महालक्ष्मी+ईश्वर=पति) अर्थात् लक्ष्मी के स्वामी हैं और जो समस्त देहधारियों के आत्मा हैं, वे भगवान विष्णु हम पर प्रसन्न हों॥46॥
May Lord Vishnu be pleased with us who, despite being pure in form, is called God (Parama=Mahalakshmi+Ishwar=Pati) i.e. Lord of Lakshmi and who is the soul of all the embodied beings. 46॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥