श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान‍्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.9.4 
उन्मत्तव्रतधृग्विप्रस्तां दृष्ट्वा शोभनां स्रजम्।
तां ययाचे वरारोहां विद्याधरवधूं तत:॥ ४ ॥
 
 
अनुवाद
तब उस उन्मत्त ब्राह्मण ने उस सुन्दर माला को देखकर उस सुन्दर विद्याधर स्त्री से उसे मांग लिया ॥4॥
 
Then that mad Brahmin, seeing that beautiful garland, asked for it from that beautiful Vidyadhar lady. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)