श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान‍्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  1.9.34 
विजितास्त्रिदशा दैत्यैरिन्द्राद्या: शरणं ययु:।
पितामहं महाभागं हुताशनपुरोगमा:॥ ३४ ॥
 
 
अनुवाद
अन्त में देवतागण दैत्यों से पराजित हो गए। तब इन्द्रादि सब देवता अग्निदेव को आगे रखकर महाभाग पितामह श्री ब्रह्माजी की शरण में गए॥34॥
 
In the end the gods were defeated by the demons. Then Indradi and all the gods took the shelter of Mahabhag Pitamah Shri Brahmaji, keeping Agnidev ahead. 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)