श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान‍्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  1.9.33 
लोभाभिभूता नि:श्रीका दैत्या: सत्त्वविवर्जिता:।
श्रिया विहीनैर्नि:सत्त्वैर्देवैश्चक्रुस्ततो रणम्॥ ३३ ॥
 
 
अनुवाद
सत्व और तेज से रहित होते हुए भी दैत्यों ने लोभ के कारण सत्व और तेज से रहित देवताओं के साथ घोर युद्ध किया ॥ 33॥
 
Despite being devoid of goodness and splendour, the demons, out of greed, waged a fierce war with the gods who were devoid of goodness and splendour. ॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)