श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान‍्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.9.31 
भवत्यपध्वस्तमतिर्लङ्घित: प्रथित: पुमान्॥ ३१ ॥
 
 
अनुवाद
अपमानित होने पर सम्मानित व्यक्ति की बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है। 31.
 
When insulted, the wisdom of a respected person becomes corrupted. 31.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)