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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन
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श्लोक 30
श्लोक
1.9.30
बलशौर्याद्यभावश्च पुरुषाणां गुणैर्विना।
लङ्घनीय: समस्तस्य बलशौर्यविवर्जित:॥ ३० ॥
अनुवाद
गुणों से रहित मनुष्य में बल, साहस आदि का अभाव होता है और दुर्बल एवं दुर्बल मनुष्य का सभी लोग अनादर करते हैं ॥30॥
A man without virtues lacks strength, courage, etc., and a weak and frail man is disrespected by everyone. ॥ 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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