vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 1: प्रथम अंश
»
अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन
»
श्लोक 30
श्लोक
1.9.30
बलशौर्याद्यभावश्च पुरुषाणां गुणैर्विना।
लङ्घनीय: समस्तस्य बलशौर्यविवर्जित:॥ ३० ॥
अनुवाद
गुणों से रहित मनुष्य में बल, साहस आदि का अभाव होता है और दुर्बल एवं दुर्बल मनुष्य का सभी लोग अनादर करते हैं ॥30॥
A man without virtues lacks strength, courage, etc., and a weak and frail man is disrespected by everyone. ॥ 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×