श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान‍्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  1.9.28 
नि:सत्त्वा: सकला लोका लोभाद्युपहतेन्द्रिया:।
स्वल्पेऽपि हि बभूवुस्ते साभिलाषा द्विजोत्तम॥ २८ ॥
 
 
अनुवाद
हे द्विजोत्तम! लोभ के प्रभाव से सारा जगत् सत्त्वशून्य (शक्तिहीन) हो गया और तुच्छ वस्तुओं के लिए भी लालायित रहने लगा ॥28॥
 
O Dwijottam! Due to the influence of greed, the entire world became devoid of sattva (powerless) and started yearning even for trivial things. 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)