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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन
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श्लोक 23
श्लोक
1.9.23
ज्वलज्जटाकलापस्य भृकुटीकुटिलं मुखम्।
निरीक्ष्य कस्त्रिभुवने मम यो न गतो भयम्॥ २३ ॥
अनुवाद
हे प्रभु! आज तीनों लोकों में ऐसा कौन है जो मेरे जलते हुए जटाओं और टेढ़ी भौंहों को देखकर भयभीत न हो जाए?॥ 23॥
Oh! Who is there in the three worlds today who would not be frightened by seeing my blazing matted hair and crooked eyebrows?॥ 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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