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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन
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श्लोक 18
श्लोक
1.9.18
श्रीपराशर उवाच
महेन्द्रो वारणस्कन्धादवतीर्य त्वरान्वित:।
प्रसादयामास मुनिं दुर्वाससमकल्मषम्॥ १८ ॥
अनुवाद
श्री पराशर बोले - तब इन्द्र तुरन्त ही ऐरावत हाथी से उतरकर भोले ऋषि दुर्वासाजी को [विनय और प्रार्थना करके] प्रसन्न करने लगे।
Sri Parashara said - Then Indra immediately came down from the Airavat elephant and pleased the innocent sage Durvasaji [by pleading and praying].
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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