श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान‍्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.9.15 
मां मन्यसे त्वं सदृशं नूनं शक्रेतरद्विजै:।
अतोऽवमानमस्मासु मानिना भवता कृतम्॥ १५ ॥
 
 
अनुवाद
हे इन्द्र! तुम मुझे अन्य ब्राह्मणों के समान ही समझते हो; इसीलिए तुमने अपने अतिशय आदर के कारण हमारा इस प्रकार अपमान किया है॥15॥
 
Indra! You certainly consider me to be equal to other Brahmins; that is why you have insulted us in this manner because of your excessive respect. ॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)